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छत्तीसगढ़भारत

स्वर्ण मंदिर की आध्यात्मिक शांति से जलियांवाला बाग की शहादत तक: अमृतसर की गलियों में छत्तीसगढ़ी पत्रकारों ने महसूस किया इतिहास का अनकहा दर्द

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Last updated: March 24, 2026 7:20 am
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Published: March 24, 2026
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अमृतसर/रायपुर: भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय रायपुर द्वारा आयोजित अंतर-राज्यीय प्रेस टूर के तहत छत्तीसगढ़ के 14 सदस्यीय पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने आज पंजाब के ऐतिहासिक शहर अमृतसर का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना और देश की साझा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होना है। प्रतिनिधिमंडल ने अपने प्रवास के दौरान सिख धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र श्री हरमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के मूक गवाह जलियांवाला बाग और मानवीय त्रासदी के जीवंत दस्तावेज विभाजन संग्रहालय का अवलोकन किया।

प्रतिनिधिमंडल ने अपनी यात्रा की शुरुआत श्री हरमंदिर साहिब में दर्शन के साथ की। 16वीं शताब्दी में चौथे सिख गुरु, श्री गुरु रामदास जी द्वारा स्थापित यह पवित्र स्थान अपनी अद्वितीय वास्तुकला और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए विश्व विख्यात है। इसकी नींव सूफी संत साईं मियां मीर द्वारा रखी गई थी, जो भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा का परिचायक है।

प्रतिनिधिमंडल ने ‘अमृत सरोवर’ और स्वर्णमंडित मुख्य भवन का अवलोकन करते हुए विश्व की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई ‘लंगर’ की व्यवस्था को भी देखा, जहाँ सेवा और समानता के भारतीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण देखने को मिला। स्वर्ण मंदिर के पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने जलियांवाला बाग शहीद स्मारक का दौरा किया। 13 अप्रैल, 1919 के उस काले दिन की गवाही देती दीवारों पर गोलियों के निशान देखकर प्रतिनिधिमंडल स्तब्ध रह गया। पत्रकारों ने उस संकरे प्रवेश मार्ग और ‘शहीदी कुएं’ पर जाकर उन अमर बलिदानियों को नमन किया, जिन्होंने देश की स्वाधीनता की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

इसके उपरांत अमृतसर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में स्थित विभाजन संग्रहालय का दौरा प्रतिनिधिमंडल के लिए पूरी यात्रा का सबसे भावुक और हृदयविदारक क्षण रहा। यह दुनिया का पहला और एकमात्र ऐसा संग्रहालय है, जो 1947 के विभाजन की उस भीषण मानवीय त्रासदी को समर्पित है जिसने करोड़ों लोगों की नियति को सदा के लिए बदल दिया था। जैसे ही प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय की दीर्घाओं में प्रवेश किया, वहाँ का वातावरण देश के बँटवारा के अनकहे दर्द और विस्थापन की मूक सिसकियों से जीवंत हो उठा। पत्रकारों ने यहाँ उन लाखों लोगों की स्मृतियों को देखा, जिन्होंने रातों-रात अपनी जड़ों, अपने पुरखों के घरों और अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया था। यहाँ प्रदर्शित शरणार्थियों के जंग लगे पुराने बर्तन, धूल धूसरित फटे हुए सूटकेस, कांपते हाथों से लिखे गए आखिरी पत्र और विस्थापन के समय की श्वेत-श्याम तस्वीरें उस दौर की उस असहनीय पीड़ा को बयां करती हैं, जिसे इतिहास की किताबों के पन्ने अक्सर समेट नहीं पाते। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने उन गलियारों में समय बिताया जहाँ विभाजन के शिकार हुए परिवारों की निजी वस्तुएं आज भी उनके संघर्ष और साहस की गवाही दे रही हैं। यहाँ संकलित मौखिक इतिहास और वीडियो रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से पत्रकारों ने यह गहराई से महसूस किया कि 1947 का विभाजन केवल मानचित्र पर खींची गई कुछ कृत्रिम लकीरें नहीं थीं, बल्कि यह दिलों के बिखरने और एक साझी तहजीब के लहूलुहान होने की एक गहरी मानवीय त्रासदी थी।

संग्रहालय के अंत में स्थित ‘उम्मीद का पेड़’ प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष चिंतन का केंद्र रहा। ‘गैलरी ऑफ होप’ में स्थित इस वृक्ष पर दुनिया भर से आने वाले लोग शांति, सद्भाव और भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी की पुनरावृत्ति न होने के संकल्प भरे संदेश छोड़ते हैं। यहाँ के दृश्यों और विस्थापन की मार्मिक कहानियों को सुनते समय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अत्यंत भावुक नजर आए और कई पत्रकारों की आँखें भर आईं। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित इस प्रेस टूर का उद्देश्य छत्तीसगढ़ और पंजाब के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करना है।

छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के इस दल ने अमृतसर के इन महत्वपूर्ण स्थलों के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक शक्ति, ऐतिहासिक संघर्षों और विभाजन के गहरे मानवीय जख्मों को करीब से समझा। यह दौरा छत्तीसगढ़ी मीडिया के लिए राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण और इतिहास की संवेदनात्मक रिपोर्टिंग को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।

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